गोटेगाँव। श्रीधाम गोटेगाँव से जबलपुर मार्ग के बीच स्थित सनेर नदी पर जबसे रोड बना है,तब से अब तक से नदी के पुल के आस पास कई दुर्घटनाएं घटित हो जाने के कारण आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में निवासरत आक्रोशित है ग्रामीण जनों में चर्चा का विषय बना हुआ है कि प्रशासन अनेकों बार घटनाएं घटित होने के बावजूद भी,कुंभकरण की नींद में सो रहा है जबकि संबंधित विभागीय कुछ उच्च अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से ऐसे खतरनाक मार्ग पर समुचित व्यवस्थाओं का प्रबंध करवाना चाहिए ताकि भविष्य में कोई अप्रिय अनहोनी घटना घटित ना होने पाए,परंतु अधिकारी कर्मचारी क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि मूकदर्शक बनकर तमाशा बीन बने हुए हैं।किसी भी अधिकारी को इस ओर ध्यान देने के लिए समय नहीं है,तभी तो प्रशासनिक अनदेखी के चलते जब चाहे जब घटित होने वाली घटनाओं के कारण,कोई ना कोई व्यक्ति असमय काल के गाल में समा रहा है,फिर भी प्रशासन मौन है आखिर क्यों ?जबकि इनका यह नैतिक दायित्व बनता है फिर भी मौन है।अभी हाल ही में बगलई ग्राम के प्रतिष्ठित कृषक समाजसेवी सुखलाल पचौरी की कार दुर्घटना में मौत हो जाने के साथ साथ ही कुछ दिनो पूर्व सिमरिया में एक वाहन दुर्घटना में एक व्यक्ति की मृत्यु हो जाने के साथ-साथ अन्य लोग घायल हुए थे।इसी तरह है भड़री चौराहा पर दो परिवारों के एक एकसत्रह अट्ठारह साल के बच्चों की मृत्यु हो चुकी थी एवं पुल खराब हो चुका है।पुल के पास आसपास वृक्षों की कटाई कराने के साथ-साथ पुल के दोनों तरफ आमने-सामने सांकेतिक बोर्ड स्पष्ट तरीके से लगाया जाए,ताकि यह आने जाने वाले वाहन चालकों को स्पष्ट रूप से नजर आ सके।इस बात पर प्रशासन को विशेष ध्यान देना चाहिए क्योंकि पुल के आसपास बहुत ही खतरनाक मोड़ है,यही मोड़ आये दिनों दुर्घटनाओं को खुला आमंत्रण देता है।इस संबंध में गाँव के मालगुजार मध्यप्रदेश कांग्रेस्स प्रदेश सचिव चौ.अजयपटेल (नरवारा) ने कहा कि सड़क पर जो निर्माणकार्य सड़क नियम के तहत होना था,वैसा नहीं किया गया क्योंकि सड़क किनारे वाली सड़क की पट्टी बहुत ही दुर्घटना वाली है और सड़क के दोनों साइड सनेर नदी से गोटेगाँव तक अत्याधिक पेड़ लगे होने के कारण मार्ग किनारों पर लगे हुुये,सांकेतिक दिशा सूचक बोर्ड भी स्पष्ट रूप से नजर नहीं आने के कारण लगातार दुर्घटना घटित हो होने पर कुछ घायल होते हैं,तो कुछ समय से पहले ही मृत्यु की शैया पर लेट जाते है फिर भी प्रशासन आँख मूंदे तमाशा देख रहा है और बड़े-बड़े जनप्रतिनिधि सत्ताधारी रोजाना सड़क से निकल रहे हैं लेकिन किसी का ध्यान भी इस ओर नहीं है।इस संबंध में चौ.पुष्पेंद्र पटेल सिमरिया ने कहा कि सड़क पर प्रशासन द्वारा जल्द से जल्द सुधार कार्य कराने की जरूरत है नहीं तो कोई भी बड़ी दुर्घटना फिर से घटित हो सकती है।अब तक कई लोगों की जान जा चुकी है,वर्तमान समय में पुल भी क्षतिग्रस्त हो चुका है फिर भी दिन रात तेज रफ्तार से वाहन निकल रहे हैं जबकि मुख्य मार्ग से गाँव को जाने वाली गलियों पर छोटे-छोटे बच्चे,छात्र-छात्राओं के साथ-साथ आम नागरिकों का आना जाना हमेशा लगा रहता है।जिससे इन मासूमों की दुर्घटना होने की भी संभावना सदैव बनी रहती है,इस संबंध में सामाजिक कार्यकर्ता अरविंद लोधी कहना है कि सड़क के किनारे पेड़ों की कटाई कराए जाने की लंबे समय से मांग की जा रही है लेकिन प्रशासन कोई ध्यान नहीं देने के साथ-साथ सांकेतिक बोर्डो की व्यवस्था सही नहीं है क्योंकि बोर्ड बहुत ही कम लगे है,खास करके टर्निंग पॉइंट जहाँ-जहाँ है,वहाँ-वहाँ अत्याधिक ध्यान देने कीआवश्यकता है।इस संबंध में पूर्व विधायक शेखर चौधरी ने कहा कि मध्य प्रदेश के बहुत बड़े बड़े नेता माँ नर्मदा की परिक्रमा पर निकले थे,अभी तो प्रशासन ने यथासंभव उनकी आओ भगत की थी,अगर ऐसी आओ भगत यात्रियों और ग्रामीण अंचल क्षेत्र को देखकर की होती तो शायद इस प्रकार से दुर्घटना घटित ना होती है।वाहन चालको को भी वाहन सीमित दायरे मे रहकर चलाना चाहिए तभी जाकर कुछ हद तक दुर्घटनाओं को रोका जा सकता है,वर्तमान समय में सनेर नदी से गोटेगाँव तक सड़क के किनारे बसे हुए बहुत सारे गाँवो को,इस सड़क मार्ग से जोड़ने के कारण गाँवो तक जाने वाली गलियों पर भी,कुछ ना कुछ व्यवस्थाएं किए जाना,जनहित की दृष्टि से न्यायोचित होगा ताकि वाहन की स्पीड कम हो जाने के साथ साथ पेड़ों की छटाई भी व्यवस्थित तरीके से करवाएं ताकि आने जाने वही वाहन चालकों को दूर से ही सब कुछ स्पष्ट रूप से नज़र आ सके।राजनैतिक विभिन्न पार्टियों के बड़े-बड़े जनप्रतिनिधि गण इस क्षेत्र में मौजूद है,उनको ग्रामीण अंचलों की चिंता होनी चाहिए ताकि आए दिन ऐसे हादसे घटित ना हो सके,लेकिन वह चुपचाप बैठे हुए हैं,जो कहीं ना कहीं चिंता का विषय भी है।आस पास के ग्राम वासिओ का कहना है कि पहले की खराब सड़क ही अच्छी थी,क्योंकि उबड़ खाबड़ सड़क होने के कारण वाहन धीरे चलते थे,जिसके कारण दुर्घटनाएं घटित नहीं होती थी,ना ही असमय लोगों की जान नहीं जाती थी।ग्रामवासियों ने गोटेगाँव से जबलपुर इस पहुँच मार्ग पर जगह जगह पर दुर्घटनाओं रोकने के लिए शासन- प्रशासन क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों से समुचित व्यवस्थाएं कराए जाने की मांग की है।
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